शनिवार, 31 जनवरी 2015

जाम-ए-तन्हाई














बाद – ए- अरसे लौटा है तेरा ख़याल
जाम –ए- तन्हाई की तलब होने को है !!



सु-मन 

10 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (01-02-2015) को "जिन्दगी की जंग में" (चर्चा-1876) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रश्मि शर्मा ने कहा…

Waaah

दिगंबर नासवा ने कहा…

वाह ... उनकी यादें और तन्हाई ... बहुत उम्दा ख्याल ...

Vaanbhatt ने कहा…

सुन्दर रचना...

Aditya ने कहा…

Your writings are sweet..

As always Crisp and Beautiful

Now, I have nominated you for the versatile blogger Award

https://www.indiblogger.in/indipost.php?post=438166

Pls check and enjoy.

Adi.

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

कुमार गौरव अजीतेन्दु ने कहा…

बहुत अच्छा लिखती हैं आप आदरणीया......हार्दिक बधाई...

कुमार गौरव अजीतेन्दु ने कहा…

एक मदद भी कीजिये...कृपया बताएं की ये मेनूबार कैसे बनता है... :)

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Unknown ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना....
http://savanxxx.blogspot.in

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