मेरे दर्द की खबर भी नहीं हुई जमाने को
दर्द मुझको और मैं दर्द को यूँ जीता रहा !!
सु-मन
बाँध लेते हैं हम
कलाई में अपनी
कुछ हिफाज़तें
जीने की खातिर
मिल ही जाती है
कुछ इस तरह
हमारी चाहों को
आस भरी तसल्लियाँ !!
सु-मन
जब कभी
....मैं
नहीं कह पाती
....तुमसे
अपने मन की बात
मुठ्ठी भर ख़ामोशी
भेज देती हूँ तुम्हें
ख़ामोशी भी बोलती है
सुन सको तो सुनना !!
सु-मन
अलसुबह , पलकों पर
एक ख़्वाब ने दम तोड़ दिया ..
रात तलक , ख़याल
ज़नाजे से उसके फूल चुनते रहे !!
सु-मन
झुलस रहा है देखो , हर ओर मेरा वतन
सेंक रहा चिता कोई , अपने ही हमवतन की !!
सु-मन
बुलबुलों से ख़्वाबों को दे दूँ पल भर की उड़ान
जीने दूँ उनको,उनके हिस्से की कुछ जिन्दगी !!
सु-मन
हर दफ़ा भूल जाते हो तुम अपनी कही हर बात
मैं सोच कर इसे पहली दफ़ा हर बार भूल जाती हूँ !!
सु-मन